Friday, May 6, 2011

जाने मैं कहाँ

ज़िन्दगी के सफ़र में
एक हल्का सा झोंका आया
और मेरी कागज़ी उम्मीदों को
उड़ा ले गया

मेरी उम्मीदें इतनी हलकी तो न थी
की एक झोके से छितरा सा गया

जब समेटने की कोशिश की
तो मालूम हुआ
की मंजिल से दूर बहुत दूर
जाने मैं कहाँ आ गया!

- रितेश रंजन (हेगड़े) - C-105, DSR Spring Beauty Apts. Brookfields, Bangalore - 37