ज़िन्दगी के सफ़र में
एक हल्का सा झोंका आया
और मेरी कागज़ी उम्मीदों को
उड़ा ले गया
मेरी उम्मीदें इतनी हलकी तो न थी
की एक झोके से छितरा सा गया
जब समेटने की कोशिश की
तो मालूम हुआ
की मंजिल से दूर बहुत दूर
जाने मैं कहाँ आ गया!
- रितेश रंजन (हेगड़े) - C-105, DSR Spring Beauty Apts. Brookfields, Bangalore - 37
Friday, May 6, 2011
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